इंग्लैंड के कप्तान Jos Buttler ने साफ शब्दों में कहा है कि बड़े टूर्नामेंटों में दबाव और उसके नतीजे द्विपक्षीय सीरीज़ से कहीं ज़्यादा भारी होते हैं — और यही फर्क मैदान पर दिख भी रहा है।
T20WC 2026 को लेकर उम्मीद थी कि 300 रन का आंकड़ा अब आम बात हो जाएगी, लेकिन टूर्नामेंट की ज़मीन पर कहानी बिल्कुल उलटी लिखी जा रही है।
अब तक खेले गए 10 मुकाबलों में 200 रन का आंकड़ा महज़ दो बार ही पार हो पाया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ एक बार किसी फुल मेंबर टीम ने यह उपलब्धि हासिल की है।

यह कारनामा किया South Africa ने, जिसने Canada के खिलाफ Ahmedabad में 213 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। फिलहाल यही इस वर्ल्ड कप का सर्वोच्च टीम स्कोर है।
दूसरी 200+ पारी उसी दिन देखने को मिली, जब Scotland ने वर्ल्ड कप में पहली बार खेल रही Italy के खिलाफ Kolkata में दिन के मुकाबले में 207 रन बना डाले।
इन आंकड़ों ने बटलर के बयान पर मुहर लगा दी है। वर्ल्ड कप जैसे मंच पर सिर्फ बल्ले की ताकत नहीं, बल्कि नसों पर काबू और हर गेंद की कीमत तय करती है कि स्कोर कितना बड़ा होगा। शायद यही वजह है कि इस टूर्नामेंट में 300 तो दूर, 200 रन भी अब एक खास उपलब्धि बनते जा रहे हैं।
IPL बनाम वर्ल्ड कप: आंकड़े खुद बोलते हैं
josh Buttler का मानना है कि भले ही Indian Premier League में 250 रन का आंकड़ा अब आम होता जा रहा हो, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप की तस्वीर बिल्कुल अलग है।

इसी भारत में खेले जाने वाले मैदानों पर आईपीएल 2025 में 73 मैचों में 52 बार 200+ स्कोर बने, जबकि इस संस्करण से पहले तक टी20 वर्ल्ड कप के 317 मैचों में सिर्फ 18 बार 200 रन से ज़्यादा का स्कोर देखने को मिला था।
यह फर्क बताता है कि जब दांव बड़ा हो, तो बल्लेबाज़ी की रफ्तार अपने-आप थम जाती है।
2019 वर्ल्ड कप की याद
बटलर ने 2019 वनडे वर्ल्ड कप का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वक्त भी 350–400 रन की बातें हो रही थीं। इंग्लैंड की टीम टूर्नामेंट से पहले कई बार 400 का आंकड़ा पार कर चुकी थी, लेकिन फाइनल में England और New Zealand दोनों ही 241 रन पर सिमट गए।
शुरुआती समय और पावरप्ले में गेंदबाज़ी ने पूरे टूर्नामेंट की दिशा बदल दी — और वही फाइनल क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में दर्ज हो गया।
भारत के मैदान और बदली परिस्थितियाँ
इंग्लैंड के नए कप्तान Harry Brook भले ही भारत में 300+ स्कोर की संभावना जता चुके हों, लेकिन बटलर जानते हैं कि यह राह इतनी आसान नहीं। उन्होंने Ahmedabad, Chennai, Delhi, Kolkata और Mumbai जैसे मैदानों पर वर्षों तक आईपीएल खेला है।
मुंबई का वांखेडे स्टेडियम, जहाँ लाल मिट्टी की पिच उछाल और गति देती है, छोटी बाउंड्री के कारण बल्लेबाज़ों के लिए मुफ़ीद माना जाता है। इसके बावजूद शुरुआती मुकाबलों में स्लोअर गेंदों और कटर्स ने बल्लेबाज़ों को खूब परेशान किया।
नेपाल और USA ने दिखाया दम
इंग्लैंड का पहला मैच Nepal के खिलाफ बेहद करीबी रहा, जहाँ 184 रन का लक्ष्य आख़िरी ओवर तक पीछा किया गया। इससे एक रात पहले India बनाम USA मुकाबले में भी गेंदबाज़ों को मदद मिली। USA के Shadley van Schalkwyk ने अपनी धीमी गेंदों से भारत को 161 पर रोका।

इंग्लैंड की ओर से Sam Curran और Jofra Archer ने भी नेपाल के खिलाफ डेथ ओवर्स में स्लोअर कटर्स का जमकर इस्तेमाल किया।
“एक रन ज़्यादा ही काफी है”
बटलर का मानना है कि टूर्नामेंट क्रिकेट में पार स्कोर या बड़े आंकड़ों पर ध्यान देने से ज़्यादा ज़रूरी है उस दिन मैच जीतना। हालात को जल्दी समझना, खुद को ढालना और विरोधी से बस एक रन ज़्यादा बनाना — यही वर्ल्ड कप जीतने का असली मंत्र है।
यही वजह है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 300 रन का सपना भले ही रोमांचक लगे, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि दबाव के इस खेल में समझदारी ही सबसे बड़ा हथियार बनती जा रही है।








