क्रिकेट में फिर लौट रहा है Tri-Series का दौर! 90s-2000s के उस रोमांच की क्यों हो रही है वापसी?

By Pradeep

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क्रिकेट में फिर लौट रहा है Tri-Series का दौर! 90s-2000s के उस रोमांच की क्यों हो रही है वापसी?

एक समय था जब क्रिकेट फैंस को किसी बड़े टूर्नामेंट का इंतजार ही नहीं रहता था। देश का दौरा शुरू हुआ नहीं कि Tri-Series का ऐलान हो जाता था।

भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका…

ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड…

या फिर तीन बड़ी टीमों के बीच ऐसा मुकाबला, जिसमें हर मैच के साथ अंक तालिका बदलती थी और आखिर में फाइनल का टिकट हासिल करने की जंग होती थी।

आज के क्रिकेट फैन के लिए यह थोड़ा अजीब लग सकता है, क्योंकि पिछले कई वर्षों में bilateral series ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर पर लगभग कब्जा कर लिया है।

लेकिन अब एक बार फिर तस्वीर बदलती हुई नजर आ रही है।

तीन देशों वाली सीरीज धीरे-धीरे वापस चर्चा में हैं और इसके पीछे सिर्फ nostalgia नहीं, बल्कि ODI क्रिकेट को दोबारा ज्यादा competitive बनाने की जरूरत भी एक बड़ी वजह है।

90s के अंत से 2010 तक था Tri-Series का सुनहरा दौर

Tri-Series कोई नया प्रयोग नहीं था। लेकिन 1990s के आखिरी वर्षों से लेकर 2010 तक के दौर में इस फॉर्मेट ने अंतरराष्ट्रीय ODI क्रिकेट में खास जगह बना ली थी।

उस समय आज की तरह क्रिकेट कैलेंडर में T20 लीग्स की भरमार नहीं थी। 50-over क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे बड़ा limited-overs format था और देशों के annual schedules में multi-team tournaments के लिए पर्याप्त जगह निकल आती थी।

ऑस्ट्रेलिया में तो summer cricket और triangular tournament लगभग एक-दूसरे के पर्याय बन चुके थे।

भारत भी इस दौर में लगातार ऐसे tournaments का हिस्सा बनता रहा।

2000 से 2010 के बीच भारत ने 2007 को छोड़कर हर साल किसी न किसी triangular या quadrangular tournament में हिस्सा लिया। इस अवधि में भारत ने ऐसे multi-team tournaments में 121 मैच खेले।

पूरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तस्वीर देखें तो 2000 से 2010 के बीच तीन या चार टीमों वाले tournaments में 439 ODI मुकाबले खेले गए।

फिर अगले दशक में कहानी पूरी तरह बदल गई।

2011 के बाद अगले 10 वर्षों में ऐसे मुकाबलों की संख्या घटकर सिर्फ 96 रह गई।

यानी यह सिर्फ कुछ Tri-Series के गायब होने की कहानी नहीं थी। ODI क्रिकेट के पूरे scheduling culture में बदलाव आ गया था।

आखिर Tri-Series का दौर खत्म क्यों हुआ?

यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है।

ऐसा नहीं हुआ कि ICC ने 2010 के बाद कोई आदेश जारी करके Tri-Series पर रोक लगा दी।

असल में क्रिकेट का पूरा calendar बदल गया।

पहले किसी देश के दौरे के दौरान तीसरी टीम को शामिल करके एक triangular tournament बनाना आसान था। लेकिन धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का schedule ज्यादा व्यस्त होता गया।

Bilateral series बढ़ीं।

ICC tournaments बढ़े।

Players के workload में इजाफा हुआ।

और सबसे बड़ा बदलाव आया T20 क्रिकेट और franchise leagues के कारण।

IPL के बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में T20 leagues की संख्या बढ़ती चली गई। खिलाड़ियों और बोर्ड्स के पास पहले के मुकाबले कम खाली समय बचा।

इसका सीधा असर ODI Tri-Series पर पड़ा।

तीन टीमों को एक ही समय पर उपलब्ध कराना, travel schedule मिलाना और tournament को bilateral commitments तथा ICC events के बीच फिट करना मुश्किल होता गया।

यानी Tri-Series की कोई official “window” बंद नहीं हुई थी।

दरअसल calendar में Tri-Series के लिए practical window ही धीरे-धीरे छोटी होती चली गई।

Bilateral Cricket ने ले ली Tri-Series की जगह

आज किसी टीम को दूसरे देश के साथ ODI खेलना हो तो तीन मैचों की bilateral series बनाना काफी आसान है।

दो टीमें।

एक schedule।

एक venue या कुछ venues।

और series खत्म।

लेकिन Tri-Series में तीसरी टीम को भी उसी समय उपलब्ध होना जरूरी है।

यही वजह है कि bilateral cricket boards के लिए ज्यादा आसान और predictable विकल्प बन गया।

लेकिन यहां एक समस्या भी पैदा हुई।

अगर भारत और किसी दूसरी टीम के बीच तीन ODI हैं, तो दोनों टीमें तीनों मुकाबलों में एक-दूसरे के खिलाफ ही खेलेंगी।

Tri-Series में कहानी थोड़ी अलग होती है।

एक टीम को दो अलग-अलग opposition के खिलाफ खेलना पड़ता है। परिस्थितियां बदलती हैं। रणनीति बदलती है। और हर मैच का असर tournament की स्थिति पर पड़ता है।

यही चीज Tri-Series को खास बनाती है।

Tri-Series में हर मैच की कहानी अलग होती है

मान लीजिए तीन टीमों का tournament है।

पहली टीम ने अपना पहला मुकाबला जीत लिया।

दूसरी टीम अगला मैच हार गई।

अब तीसरी टीम के पास मौका है कि वह अगले मैच में जीतकर points table का समीकरण बदल दे।

और फिर आता है फाइनल।

यानी सिर्फ series जीतने की बात नहीं होती।

हर मुकाबला आपको फाइनल तक पहुंचाने या बाहर करने की दिशा में एक कदम होता है।

यही competitive pressure ODI क्रिकेट को ज्यादा दिलचस्प बना सकता है।

2025-26 में पाकिस्तान ने फिर दिखाया रास्ता

पाकिस्तान ने हाल के समय में Tri-Series format का इस्तेमाल काफी ज्यादा किया है।

2025 में पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ ODI Tri-Series खेली थी। इसके अलावा पाकिस्तान ने UAE और अफगानिस्तान के साथ T20I Tri-Series भी खेली।

बाद में पाकिस्तान, श्रीलंका और जिम्बाब्वे के बीच भी T20I Tri-Series हुई।

इससे यह संकेत जरूर मिला कि multi-team cricket को पूरी तरह पुरानी चीज मानने की जरूरत नहीं है।

पाकिस्तान का यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 ODI World Cup से पहले टीमों को ज्यादा competitive 50-over cricket खेलने की जरूरत होगी।

2026 में फिर बड़ा ODI Tri-Series मुकाबला

अब 2026 में भी तीन देशों वाली ODI cricket को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है।

पाकिस्तान में पाकिस्तान, इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच ODI Tri-Series प्रस्तावित है।

तीनों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी और tournament के अंत में फाइनल होगा।

यानी एक बार फिर वही पुराना format दिखाई देगा—

तीन टीमें, points table और फिर final।

और यही वह format है जिसे 2000s की क्रिकेट देखने वाली generation अच्छी तरह पहचानती है।

भारत के लिए भी यह फॉर्मेट क्यों जरूरी हो सकता है?

भारत का ODI calendar दुनिया के सबसे व्यस्त cricket calendars में से एक है।

ऐसे में हर series में सिर्फ दो टीमों को शामिल करने के बजाय कुछ bilateral ODI series को multi-team tournaments में बदला जा सकता है।

इसका फायदा खिलाड़ियों को भी मिल सकता है।

एक ही tournament में अलग-अलग प्रकार की टीमों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिलेगा।

उदाहरण के लिए किसी टीम को पहले मजबूत pace attack का सामना करना पड़े और अगले मैच में spin-heavy टीम सामने हो।

World Cup जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी में यह अनुभव काफी काम आ सकता है।

शुभमन गिल भी Tri-Series जैसे format के पक्ष में

भारत के मौजूदा ODI setup में भी multi-team cricket को लेकर चर्चा हुई है।

शुभमन गिल ने ODI क्रिकेट को ज्यादा competitive बनाने के लिए Tri-Series और Quadrangular Series जैसे formats की जरूरत की बात कही है।

उनकी सोच के पीछे एक बड़ा सवाल है—

क्या हर बार तीन मैचों की bilateral series ही ODI क्रिकेट का सबसे अच्छा format है?

अगर कुछ series को तीन या चार देशों के tournaments में बदल दिया जाए तो बिना बहुत ज्यादा अतिरिक्त cricket जोड़े ODI मुकाबलों में context और competition बढ़ाया जा सकता है।

यही बात आज Tri-Series की वापसी को सिर्फ nostalgia से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है।

2000s का क्रिकेट और आज का क्रिकेट—सबसे बड़ा फर्क क्या है?

2000 के दशक में क्रिकेट फैंस के लिए Tri-Series सामान्य बात थी।

आज वही चीज special event जैसी लगती है।

इसका कारण यह नहीं है कि Tri-Series अचानक बेहतर format बन गया है।

असल कारण यह है कि आज हम इतने ज्यादा bilateral और T20 cricket के आदी हो चुके हैं कि तीन देशों वाला ODI tournament अलग दिखाई देता है।

90s और 2000s की generation को याद होगा कि tournament शुरू होने से पहले ही चर्चा शुरू हो जाती थी—

कौन फाइनल में पहुंचेगा?

कौन बाहर होगा?

किस बल्लेबाज के सामने कौन सा गेंदबाजी attack बेहतर है?

और फाइनल में किसका सामना किससे होगा?

यही narrative Tri-Series को खास बनाता था।

क्या Tri-Series ODI क्रिकेट को बचा सकती है?

सिर्फ Tri-Series से ODI क्रिकेट की सारी समस्याएं खत्म नहीं होंगी।

लेकिन यह format एक महत्वपूर्ण समस्या का समाधान जरूर कर सकता है—context।

आज अगर कोई bilateral ODI series बहुत ज्यादा competitive नहीं है, तो दर्शकों की दिलचस्पी कम हो सकती है।

लेकिन अगर वही मैच किसी Tri-Series का हिस्सा हो और टीम को फाइनल में पहुंचने के लिए जीत जरूरी हो, तो मुकाबले का महत्व तुरंत बढ़ जाता है।

इसलिए भविष्य में boards को हर bilateral series को खत्म करने की जरूरत नहीं है।

बल्कि कुछ series को multi-team format में बदलना ज्यादा समझदारी हो सकती है।

2027 World Cup से पहले इसका महत्व और बढ़ सकता है

2027 में ODI World Cup खेला जाना है।

इससे पहले दुनिया की बड़ी टीमों को 50-over क्रिकेट में अपनी combinations, middle order, bowling attack और bench strength को परखना होगा।

Tri-Series इसके लिए अच्छा platform बन सकती है।

तीन अलग-अलग teams के खिलाफ खेलने से खिलाड़ियों को अलग परिस्थितियों और रणनीतियों का सामना करना पड़ेगा।

और सबसे बड़ी बात—World Cup से पहले pressure games खेलने का मौका मिलेगा।

क्या हम फिर से पुराने दौर में लौट रहे हैं?

शायद पूरी तरह नहीं।

आज का क्रिकेट 2000s वाला क्रिकेट नहीं है।

T20 leagues का विस्तार हो चुका है, खिलाड़ियों का workload पहले से कहीं ज्यादा है और international calendar काफी crowded है।

इसलिए यह उम्मीद करना सही नहीं होगा कि हर दूसरे महीने कोई Tri-Series देखने को मिलेगी।

लेकिन अगर 50-over cricket को लंबे समय तक मजबूत रखना है तो कुछ multi-team tournaments की वापसी बिल्कुल सही दिशा हो सकती है।

पाकिस्तान का हालिया प्रयोग, Tri-Series को लेकर बढ़ती चर्चा और ODI क्रिकेट को ज्यादा context देने की जरूरत—इन सबको एक साथ देखें तो एक बात साफ दिखाई देती है।

क्रिकेट शायद अपने पुराने format को पूरी तरह वापस नहीं ला रहा…

लेकिन Tri-Series का पुराना रोमांच जरूर दोबारा तलाश रहा है।

और अगर ऐसा होता है तो 2000s में क्रिकेट देखने वाली generation के लिए इससे अच्छी nostalgia वाली खबर शायद ही कोई हो।

क्योंकि आखिर में Tri-Series सिर्फ तीन देशों का tournament नहीं था।

यह एक ऐसी क्रिकेट कहानी थी, जिसमें हर मैच अगले मैच की कहानी तय करता था।

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