हिन्दी सिनेमा का शुरुआती दौर काफी संघर्ष भरा रहा और तब इसमें मेहनत कर रहे लोग इस सिनेमा को सफलता के मुकाम पर ले आये पर अब वो बात आज के हिन्दी सिनेमा में नजर नहीं आती। कभी कभी कुछ शानदार फिल्में बन जाती हैं पर कई सालों में।

यहां हिन्दी फिल्मे देख-देख कर दिमाग का दही हुआ जा रहा है और बॉलीवुड है कि मानता ही नहीं। हर बार बिना कहानी की फिल्में दर्शकों के सामने परोस दी जाती हैं और 100 करोड़ी क्लब में Entry पा जाती हैं। बस हो गई फिल्म हिट। बस यही सोच रह गई है हिन्दी सिनेमा के फिल्म निर्देशकों की। इन लोगों का कहानी से कोई लेना-देना नहीं होता। ये लोग सोचते हैं कि एक सुपर स्टार हो और एक कचरा कहानी फिर हो गया काम।

बॉलीवुड को कब अक्ल आयेगी, अब हिन्दी दर्शकों को दक्षिण भारतीय फिल्में आकर्षित करने लगी हैं क्योंकि यहां काम करने वाले लोग कहानी, मानवीय संवेदना, संस्कार आदि को मिलाकर एक शानदार फिल्म का निर्माण करते हैं जिससे ये फिल्में हर दर्शक के दिल में जगह बनाती हैं।

बात सिर्फ हाल ही में रिलीज हुई फिल्म पुष्पा की ही नहीं बल्कि पिछले कुछ सालों में दक्षिण भारत की बड़ी फिल्में पैन इंडिया में रिलीज हुई है जिससे देश के हर राज्य का दर्शक फिल्मों को पसंद कर सके। अक्षय कुमार, सलमान खान, अजय देवगन, शाहिद कपूर, और भी कई एक्टर्स अपने करियर को बचाने के लिये वहां की फिल्मों को रिमेक करने में लगे रहते हैं।

आज तो दक्षिण भारत की लगभग हर फिल्म का हिन्दी डब youtube पर मिल जायेगा जिससे बॉलीवुड के निर्देशक अब दर्शकों का पोपट नहीं कर सकेगे। क्योंकि यदि वे इस पर फिल्म बनाते हैं, तो दर्शकों को पता चल जायेगा कि यह फिल्म तो वे पहले ही देख चुके हैं।

साल 2015 में बाहुबली से शुरु हुआ यह प्रयोग अब नये शिखर तक आ गया है। और यह सही भी है क्योंकि इसकी वजह से पूरा भारतीय सिनेमा एक छत के नीचे आ चुका है। जहां पर हिन्दी सिनेमा को बहुत सुधार की जरुरत है।

By Pradeep

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